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निष्पक्षता और तटस्था

टस्थ रहना फिर भी आसान है 
Being Neutral and Unbiased, Being Unbiased, Impartiality, Neutrality, निष्पक्षता, तटस्था, निष्पक्षता और तटस्थापर यहाँ तो अच्छे-अच्छे तुर्रमखानो को देख लिया 
निष्पक्ष रहना बड़ा मुश्किल है 

खासकर अपने महान भारत में ,

कांग्रेस, बीजेपी, वामपंथ वाली निष्पक्षता सोच रहे हो, तो 
उसी निष्पक्षता की एक बत्ती बनाओ 
और सुट्टा मारो 

सामाजिक निष्पक्षता की बात हो रही है 
(ये पार्टियाँ जब पैदा भी नही हुई थीं ..समाज उससे भी बहुत पहले से है)

हाँ तो मैं क्या कह रहा था, सामाजिक निष्पक्षता 
देखो बहीखाते वाली बात है

वाद पुराण

ये वाद वो वाद
औंगा वाद पोंगा वाद 
इधर का वाद
उधर का वाद 
हर वाद में कुछ न कुछ अच्छाइयी मिल ही जाती है ढूंढने पे 
पर जातिवाद में नही मिलती ...
जातिवाद , casteism, casteism in india, adherence to a caste system, prejudice or discrimination on the grounds of caste,
जातिवाद और जातिवादिओ से घिन्न आती है... जितना हो सके, दूर रहो ऐसो से

जात और जेब

भारत और भारतीयों के लिए सबसे जरुरी दो बातें:
एक आपकी जात
दूसरा आपकी जेब गर्म या ठंडी

लगभग पूरा भारत, ऐसे ही चम्पुओं से भरा पड़ा है..
बदलाव आ रहा है, पर बहुत धीरे धीरे

आपके मानने या न मानने से सच नहीं बदलेगा
इसी चम्पूप्रदेश में हम भी रहते हैं.. इसलिए थोड़ा हसो, मुस्कराओ और खुल कर जियो

जातिवाद का आधुनिक रूप

हम दोनों खूब बातें करते थे अपने अपने पुराने असफल प्यारो के बारे में
उसके पेपर मेरी अलग व्यस्तता .. कुछ बीच में नहीं आता था हमारी बातो के
बात शुरू करने का तो पता था ..पर खत्म कब और कैसे होगी ... वो बैलेंस खत्म होने पे ही पता चलता था

धीरे धीरे नज़दीकियां बढ़ती गयीं ....... फिर....

मैं: ओये प्यार करती है मुझसे
कन्या: हाँ
मैं : कितना?
कन्या: बहुत ... ढक्कन इतनी बातें करते हैं हम दोनों ... फिर भी ए सवाल grumpy emoticon

आरक्षण

आरक्षण! 
" गाँव भर की भौजाई । "

जो जहाँ पाया , वहीं छेड़खानी कर बैठा । 
दिन , दोपहर , रात !

एक कहता है कि प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण नहीं देंगे । 
दूसरा कहता है कि प्रोन्नति में आरक्षण नहीं देंगे। 
तीसरा कहता है कि एकल पद पर आरक्षण नहीं देंगे।
चौथा कहता है कि क्रीमी लेयर वालों को आरक्षण नहीं देंगे। 
पाँचवाँ कहता है कि न्यायिक सेवाओं में आरक्षण नहीं देंगे।

जातिवाद:भारत

ब्राह्मण कहते है हमने जातिवाद नही फैलाया!!!! ...
बिल्कुल ठीक कहते हैं
आपको पता है.. बहुत गलत थ्योरी है ये कि
ब्राह्मणो ने जातिवाद फैलाया और क्षत्रियो ने वर्णव्यवस्था..उसी क्रम में जातिवाद की रक्षा की

सही और सटीक थ्योरी ये है::

जातिवाद तो शूदो ने फैलाया है पुरातन शुरातन काल से ही
कितना लॉजिकल लगता है ना,.. 
पहले वर्णव्यवस्था बनाई शुद्रो ने.. खुद को सबसे नीचे रखा
फिर अपने में से ही जिन लोगो ने थोड़ा बहुत विरोध किया .. उन्हें अछूत बना दिया
जो ज्यादा तीन-पांच कर रहे थे, उन्हें जंगल में भगा के आदिवासी बना दिया
ब्राह्मण वर्ग ने बहुत आवाजें उठाई इन् सबके लिए .. पर सब व्यर्थ
कोई सुनने को राजी ही नहीं था बेचारो की

जाति

महान भारत के घटिया पुरषो ने अपने लिए जातियां बनाई
और महिलाओं ने अपने लिए ... नही
[ उनकी अपनी कोई सोच कहाँ होती है ]
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