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बेचारा सांप

केवल अपने बचाव में हमला करता है फिर भी बुरी तरह बदनाम है
कभी इसकी चमड़ी का जूता बनाया गया तो कभी ज़हर से दवा..

शिव का गमछा हुआ तो कभी मॉडल्स की बिकिनी 
ये विष्णु का बेड हुआ तो कृष्ण का डांस फ़्लोर भी..
सांप, snake, mahashivratri, शिवरात्रि, महाशिवरात्रि
कोल्ड ब्लडेड अपराधी शब्द इस्तेमाल कर इसे नीचा दिखाया गया तो कभी शेष नाग बना कर पूजा भी गया..

नाग नागिन की फ़िल्मों से ले के पोर्न तक और snake bite, snake wine, cobra blood wine रुपी नशे तक युवाओं ने भी इसका लुफ्त उठाया..

कभी इच्छाधारी तो कभी मणिधारी बता
पूंजीवादी होने के झूठे इलज़ाम भी लगे..

"सर्प और नारी जितने खूबसूरत उतने ज़हरीले"

निष्पक्षता और तटस्था

टस्थ रहना फिर भी आसान है 
Being Neutral and Unbiased, Being Unbiased, Impartiality, Neutrality, निष्पक्षता, तटस्था, निष्पक्षता और तटस्थापर यहाँ तो अच्छे-अच्छे तुर्रमखानो को देख लिया 
निष्पक्ष रहना बड़ा मुश्किल है 

खासकर अपने महान भारत में ,

कांग्रेस, बीजेपी, वामपंथ वाली निष्पक्षता सोच रहे हो, तो 
उसी निष्पक्षता की एक बत्ती बनाओ 
और सुट्टा मारो 

सामाजिक निष्पक्षता की बात हो रही है 
(ये पार्टियाँ जब पैदा भी नही हुई थीं ..समाज उससे भी बहुत पहले से है)

हाँ तो मैं क्या कह रहा था, सामाजिक निष्पक्षता 
देखो बहीखाते वाली बात है

वाद पुराण

ये वाद वो वाद
औंगा वाद पोंगा वाद 
इधर का वाद
उधर का वाद 
हर वाद में कुछ न कुछ अच्छाइयी मिल ही जाती है ढूंढने पे 
पर जातिवाद में नही मिलती ...
जातिवाद , casteism, casteism in india, adherence to a caste system, prejudice or discrimination on the grounds of caste,
जातिवाद और जातिवादिओ से घिन्न आती है... जितना हो सके, दूर रहो ऐसो से

मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना

हिन्दू ,मुस्लिम,सिख,इसाई आपस में सब भाई भाई
मतलब
हिन्दू-हिन्दू आपस में
मुस्लिम-मुस्लिम में
सिख-सिख में,
इसाई-इसाई में
इसी तरह


सोशल मीडिया और नास्तिकता

जीब तरह के नास्तिको(नमूनो) से भरी पड़ी है सोशल मीडिया
एक धर्म की बुराई करो दूसरे की बढ़ाई करो, बन जाओ नास्तिक

धर्मनिरपेक्षता और नास्तिकता,, दोनों शब्दों का मज़ाक बना दिया है कमबख़्तो ने
अपने अपने पसंद का खम्बा पकड़ रखा है सारे भेड़िओ ने.. उसी पर टांग उठाये करते रहते हैं

भारत और पाकिस्तान

भारत और पाकिस्तान    
भारत और पाकिस्तान, INDIA-PAKISTAN ties, भारत पाकिस्तान संबंध, भारत पाकिस्तान मित्रता
भारत और पाकिस्तान

लंगोटिया यार थे..
नहीं नहीं
एक ही लंगोट में थे

पर कुछ लोगो ने
खीच के लंगोट फाड़ दी
अलग कर दिया दोनों को
एक के पास थोड़ा बड़ा हिस्सा आया
दुसरे के पास छोटे वाला

कभी रूस

हर अभियान मांगे जन-सहभागिता

जन सहभागिता, स्वच्छ भारत अभियान, people should cooperate, participation of people must, swachh bharat abhiyan, clean india campaign, modi's clean india campaign
स्वच्छ भारत अभियान 
कुछ नौ दस महीने पहले की बात है. सरकार ने सिगरेट के दामों में भारी बढ़ोतरी की थी, ये कहते हुए कि इससे धूम्रपान को बढ़ावा मिलना कम होगा और लोग तंबाकू सेवन कम करेंगे. हालाँकि इससे राजस्व में बढ़ोतरी के अलावा कुछ हुआ नहीं. इसके कुछ दिनों बाद गैस सब्सिडी छोड़ने का आग्रह किया गया ये कहते हुए कि इससे ग़रीबों के घर चूल्हे जलाने में मदद मिलेगी. वो बात अलग है कि ऐसा कुछ हुआ नहीं. स्वच्छता अभियान शुरू किया गया ये कहते हुए कि देश को साफ करना देशवासियों का पहला कर्तव्य है.

जन सहभागिता, स्वच्छ भारत अभियान, people should cooperate, participation of people must, swachh bharat abhiyan, clean india campaign, modi's clean india campaign, save trees, save forest
जन सहभागिता से बचेंगे वन
 आज भी सिगरेट की खपत कम नही हुई है. आज भी देश साफ नहीं हुआ है. आज भी ग़रीबों के घर चूल्हा नहीं जला है. कागज़ी अभियानों से किसको फायदा हुआ है ये जाँच का विषय हो सकता है, लेकिन एक बात तो सामने है सबके, कोई भी

कुकिंग

घर की
बाहर की.....
किसी भी महिला के दिल का दरवाजा
न गहनो से न झुटे प्यार से ज्यादा देर बहलता है
कुकिंग में इंवॉल्व होइए... दिल में एक जगह बना लोगे

बाकी अच्छाइयां भी जरुरी हैं, उनका भी ध्यान रखिये

जात और जेब

भारत और भारतीयों के लिए सबसे जरुरी दो बातें:
एक आपकी जात
दूसरा आपकी जेब गर्म या ठंडी

लगभग पूरा भारत, ऐसे ही चम्पुओं से भरा पड़ा है..
बदलाव आ रहा है, पर बहुत धीरे धीरे

आपके मानने या न मानने से सच नहीं बदलेगा
इसी चम्पूप्रदेश में हम भी रहते हैं.. इसलिए थोड़ा हसो, मुस्कराओ और खुल कर जियो

मुद्दे

मुद्दे कभी नहीं मरते
जिनपे आप बहुत पहले लिख चुके थे
उन्ही मुद्दो को, उन्ही बातो को
थोड़ा बदल के, हेर फेर करके
आज फिर से देख रहे हैं

क्योकि मुद्दे आज भी मुद्दे ही हैं
सुलझे नही हैं अब तक वो
सुलझेंगे कैसे

गाली और सामाजिकता

गाली हमेशा से समाज की परंपरा रही है गाली सिर्फ भारत में ही नहीं अपितु सभी देशों में दी जाती रही है। इसके खोजकर्ता का पता लगा पाना मुश्किल ही है।

गाली देने का मतलब एक व्यक्ति का दूसरे व्यक्ति के प्रति गुस्सा जाहिर करने से लगाया जाता है

गालियां भी कई तरह की होती है आमतौर पर इन्हें दो वर्गों में बांटा जा सकता है अच्छी गालियां और बुरी गालियां अच्छी गालियों मे

कबीरपंथी

बीर ने हर धार्मिक ढकोसले का विरोध किया
और अपने आप को कबीरपंथी कहने वाले कुछ गवार लोग
सत्संग में मगन होते जा रहे हैं कबीर क नाम पे ही
निकम्मे निट्ठले गुरु बाबाओ की भी फ़ौज बनाते जा रहे हैं
कबीरपंथी, kabirpanthi, kabir, kabeerpanthi, कबीर, बाबा रामपाल , गुरु रामपाल, रामपाल
मुंडन के बाल गंगा में डालने को नाटक कहते हैं- सही है
पर उन्ही बालो को आटे में संजो के रख लेते हैं!
दूसरा बचा पैदा होगा क्या आटे से ?

रिश्ते और विश्वगुरु

अनजान लड़की बहन/दीदी बना दी जाती है
अनजान लड़का भाई/भईया बना दिया जाता है

सोच कभी इन बेमतलब के रिश्तो से आगे गयी नही इनकी और विश्वगुरु बनेंगे
लड़की की इज़्ज़त तभी करोगे जब उसके भाई बनोगे? बहना बनके ही इज़्ज़त होती है?
इंसान समझ लो एक दूसरे को ,, बस यही बहोत है बेशर्मो

सोच सुधारो, देश बाद में सुधार लेना

जनता और रोष

जितनी सक्रियता और रोष, घटना होने के बाद दिखाती है जनता
उतनी सतर्कता पहले दिखाए, तो घटना ही न हो
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भारत कैसे आगे बढे

भारत कैसे आगे बढे
जहाँ हर दूसरी बात घूम फिर के,
चाहे कन्याकुमारी से टहलते टहलते बात लातूर हो आये,
माँ बहन पर तो जरूर आएगी

इस मापदंड पे परखू, तो गिनती के प्रगतिशील ही दिखते हैं
मानो या न मानो, सच तो यही हैं
इस कसौटी पर महिलाये ही फिसल रही हैं सबसे ज्यादा

पति-पत्नी



पति पत्नी की सेवा करे, तो ये पति का प्यार और बड़प्पन है
पत्नी पति की सेवा करे, तो ये उसकी जिम्मेदारी और कर्त्तव्य है

महान है ये भारत और भारीतय तो कतई अव्वल दर्जे के......

ईश्वर/अल्लाह/गॉड



ईश्वर/अल्लाह/गॉड
का होना ना होना एक अलग मुद्दा है
पर सोचने वाली बात.. और पूछने वाली भी
ये है



इन् गधे रुपी धार्मिक अन्धो को अपने अपने धर्म का ठेका
आखिर मिला कब

तू(खुद)

सनातन पवित्र है      
इस्लाम सर्वश्रेष्ठ है

सनातन ही शांति है    
इस्लाम ही बल है

अल्लाह ही भगवान है
ईश्वर ही मौला है

रिश्तो का चक्रव्यूह

रिश्तो का चक्रव्यूह है भैया
अभिमन्यु माँ के पेट से चकर्व्युह में घुसना ही नहीं
उसे बनाना .. जटिलतम बनाना भी सीख के आता है

दौरे-चम्पूगिरी यूँही चलती रही है भारत में
यूँही चलती रहेगी

जड़ को खत्म करे बिना
कितना ही शोर मचा लो
कुछ नही बदलने वाला
स्त्री मुक्ति के लिए धर्म का नाश करो
रिश्तो की तिलांजलि दो

उभार

अजब है उभारो की गाथा

मैं कुछ लिख दूँ उभारों के बारे में
तो मैं ठरकी
या मस्तराम का चेला

कोई लड़की/.महिला कुछ लिख दे
उभार ये उभार वो करके
तो वो समाजसुधारक
प्रगतिशील

आधुनिकता में भी लिंगभेद छुपा है
चश्मे का नंबर बढाइये

Source: Facebook Post

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